Posts

यादें साथ रहती हैं

  यादें साथ रहती हैं हर वक्त याद ना होते हुए भी साथ रहती हैं आधी रात के सन्नाटे में आंख बंद करते ही  अचानक आती हैं दबे पाव उंगली पकड़कर अतीत की गलियों में दौड़ा देती हैं और ले जाती हैं सुदूर सफर पर यादें खिलते हरसिंगार की खुशबू की तरह बहला जाती है कराहते दिल को यादें, कितनी भी मेहनत से धकेलते रहो फिर भी ज़हन में बार बार लौट आती हैं उस ज़िद्दी मच्छर की तरह जिसे कमरे से बाहर निकालकर हम जैसे ही आंख बन्द करके राहत की सांस लेते हैं कि कान पे मंडराते हुए कहता है, मैं अभी जिंदा हूं , और यही हूं कभी कभी यादों के अंधड़ से ऐसे ही अचानक कुछ याद आना और झटके से नींद का खुलना जैसे किसी अंधेरी रात में तूफ़ानी हवाएं सालों से बंद दरवाजा झट से अचानक खुल जाए यादें, सिमटती और बिखरती रहती हैं, जैसे पतझड़ में फुहार की तरह झड़ते पत्ते और, पछुआ हवा का समेटकर कहीं ढेर बना देना और दूसरे ही पल हवा का रुख बदलना पत्तों का उड़कर दूसरी जगह फिर इकट्ठा होना यादें कभी-कभी घटाओ की तरह बरस के मन को भिगो जाती है दादी की कहानी दादा के किस्से मां के हाथ का स्वाद चाची के सिखाए कढ़ाई बुनाई के नमूने मौसी के हाथ की...