यादें साथ रहती हैं

 यादें साथ रहती हैं

हर वक्त याद ना होते हुए भी
साथ रहती हैं

आधी रात के सन्नाटे में
आंख बंद करते ही 
अचानक आती हैं
दबे पाव
उंगली पकड़कर
अतीत की गलियों में दौड़ा देती हैं
और ले जाती हैं सुदूर सफर पर

यादें
खिलते हरसिंगार की खुशबू की तरह
बहला जाती है कराहते दिल को
यादें, कितनी भी मेहनत से
धकेलते रहो फिर भी ज़हन में बार बार लौट आती हैं
उस ज़िद्दी मच्छर की तरह
जिसे कमरे से बाहर निकालकर हम जैसे ही
आंख बन्द करके राहत की सांस लेते हैं
कि कान पे मंडराते हुए कहता है,
मैं अभी जिंदा हूं , और यही हूं

कभी कभी
यादों के अंधड़ से ऐसे ही अचानक कुछ याद आना
और झटके से नींद का खुलना
जैसे किसी अंधेरी रात में तूफ़ानी हवाएं
सालों से बंद दरवाजा झट से अचानक खुल जाए

यादें,
सिमटती और बिखरती रहती हैं,
जैसे
पतझड़ में फुहार की तरह झड़ते पत्ते
और, पछुआ हवा का समेटकर
कहीं ढेर बना देना
और दूसरे ही पल हवा का रुख बदलना
पत्तों का उड़कर दूसरी जगह फिर इकट्ठा होना

यादें
कभी-कभी घटाओ की तरह बरस के
मन को भिगो जाती है
दादी की कहानी
दादा के किस्से
मां के हाथ का स्वाद
चाची के सिखाए कढ़ाई बुनाई के नमूने
मौसी के हाथ की  तेज आवाज में ढोलक कि थाप
पड़ोस की चाचियों के शगुन के गीत
दीदी के घुंघरू
बाबा की नसीहत
नानी की झप्पी
नाना की लाइब्रेरी
लड़कपन की लापरवाही
युवा सपने,
और कितना कुछ

यादें तो अपना सरमया है, अपना खज़ाना
यादें मुक्त हो जाती हैं वक्त और जगह की कैद से
शामिल हो जाती हैं
गगन पे झिलमिलाते तारों में
फूलों की महक में
ओस की नमी में
अंधेरी रात में भी
और उगते सूरज में भी
नए रिश्तों की गर्माहट में
युवा सपनों, उम्मीदों और आकांक्षाओं में

सफेद बालों  में हाथ फिराते हुए
मुस्कुराते हुए
देखते हैं
वर्तमान से होकर भविष्य की तरफ जाते हुए
अतीत के इस अनवरत बहाव को
जिसे वक्त ने लिखा
और अभी भी
वर्तमान नया पन्ना जोड़ते जोड़ते
अतीत बनता जा रहा है

यादें खज़ाना हैं,
अफसोस, पछतावा,आंसू, वेदना,खुशी
सब कुछ समय के साथ पीछे छूटा है
अब तो
कड़वी, कसैली,मीठी , खट्टी, यादें कहानी बन गई हैं
जब भी पास आएं
पढ़ के अच्छा ही लगता है
इस कहानी कि किताब को

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